कश्मीरी खड़ा बाजार में

By

Jul

17

2016

कश्मीर में अमन है। पहली नजर में देखने में ये अमन बंदूक के खिलाफ बंदूक की ताकत का अमन दिखता है। जम्मू स्टेशन पर उतरने के बाद श्रीनगर यानी धरती पर जन्नत मेंहर तरफ बंदूक के साथ चौकस सुरक्षाबल के जवान इस बात का भरोसा तो दिलाते हैंकि कश्मीर में अमन है लेकिन, साथ ही दहशत का अहसास भी दिलाते रहते है असल में दहशतगर्दी को यहां बंदूक ने नहीं बाजार ने मात दे दी है। ... Full story

गरीबी के जहन्नुम में पाकिस्तान

By

Jul

01

2016

सन सैंतालिस में बंटवारा क्यों हुआ इसकी खोजबीन भारत में न के बराबर हुई है, हुई भी है तो राजनीतिक कारणों को जानने से आगे जाने की कोशिश नहीं की गयी है। लेकिन भारत के उलट पाकिस्तान में इस बात पर खूब बहस हुई है कि पाकिस्तान क्यों बनाया गया। बहुत सारे तर्क है, तथ्य हैं जिनमें एक तर्क है व्यापार। एक बुद्धिजीवी वर्ग ऐसा भी है जो यह मानता है कि बंटवारे के मूल में मुस्लिम व्यवसाइयों के हित थे जिन्हें डर था कि अगर आजादी आई तो हिन्दुओं के बीच व्यापार करना मुश्किल हो जाएगा। ... Full story

तेजस का जस

By

Jul

01

2016

कोटा हरिनारायण आज जहां कहीं भी होंगे, बहुत खुश होंगे। उनका "बच्चा" सेना की सेवा में शामिल हो गया। सीरियल प्रोडक्शन सीरिज के दो लड़ाकू विमान तेजस मार्क-1 को लेकर आज पहले स्कवार्डन का गठन हो गया। वायुसेना ने पहले ही तेजस के स्वागत के लिए सारी जरूरी तैयारियां कर ली हैं और ऐलान किया है जैसे जैसे तेजस की डिलिवरी मिलती जाएगी वे सुविधाओं में विस्तार करते जाएंगे। अभी हिन्दुस्तान एयरॉनॉटिक्स लिमिटेड सालाना छह तेजस का उत्पादन कर रहा है जिसे अगले दो साल में बारह तेजस सालाना करने की योजना है। इसलिए तेजस का पूरा बेड़ा तैयार होने में अभी भी कम से कम एक दशक का समय लगेगा लेकिन तीन दशक की कोशिशों ने आज अपने अंजाम को हासिल कर लिया। ... Full story

लोक स्वराज्य का लक्ष्य

By

Jun

24

2016

भारत में पूर्व काल से अब तक अनेक नेता अथवा राजनीति के संबंध में विचार प्रस्तुत करने वाले महापुरुष हो चुके हैं। बहुत पुराने ऐतिहासिक राजाओं तथा महापुरुषों से चर्चा शुरु न करके हम स्वामी दयानन्द से यह चर्चा प्रारंभ करते है क्योंकि वे नवीनतम समय के महापुरुष हैं जिसके अधिकृत विचार उपलब्ध हैं। स्वामी जी ने आर्य समाज के दस नियमों में ही इस बात का स्पष्ट उल्लेख किया है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने व्यक्तिगत निर्णय में पूर्ण स्वतंत्रता होनी चाहिये तथा दूसरों की स्वतंत्रता को प्रभावित करने वाले मामलों में व्यक्ति पूरी तरह परतंत्र रहें। मेरे विचार में स्वराज्य की यह परिभाषा स्पष्ट और पूर्ण है। ... Full story

पर्यावरण दिवस की चेतावनी

By

Jun

05

2016

वायुमंडल, जलमंडल और अश्ममंडल - इन तीन के बिना किसी भी ग्रह पर जीवन संभव नहीं होता। ये तीनो मंडल जहां मिलते हैं, उसे ही बायोस्फियर यानी जैवमंडल कहते हैं। इस मिलन क्षेत्र में ही जीवन संभव माना गया है। इस संभव जीवन को आवृत कर रक्षा करने वाले आवरण का नाम ही तो पर्यावरण है। जीवन रक्षा आवरण पर ही प्रहार होने लगे.... तो जीवन पुष्ट कैसे रह सकेगा ? हर पर्यावरण दिवस की चेतावनी और और समाधान तलाशने योग्य मूल प्रश्न यही है, कितु पर्यावरण दिवस, 2016 की चिंता खास है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने ’वन्य जीवन के अवैध व्यापार के खिलाफ जंग’ को पर्यावरण दिवस, 2016 का लक्ष्य बिंदु बनाया है। ... Full story

चाबहार की बहार

By

Jun

05

2016

इन दिनों अन्तराष्ट्रीय राजनीति व मंचों पर, विशेषतः अमेरिका, चीन, जापान, पाकिस्तान सहित समूचे एशिया में जिस शहर का नाम और जिस परियोजना का नाम बहुचर्चित है वह है चाबहार बंदरगाह परियोजना. चाबहार ईरान के बलूचिस्तान प्रदेश का एक छोटा सा मात्र एक लाख की जनसँख्या वाला एक बलूची नगर है. ... Full story

हरी नदी पर हर हर गंगे

By

Jun

05

2016

अफगानिस्तान में हिन्दुकुश हिमालय जैसा दर्जा रखता है। उसकी ऊंचाई, उसका गौरव और उसकी नदियां। इसी हिन्दुकुश पर्वतश्रृंखला के बाबा पहाड़ी से निकलती है हरी नदी जिसे अफगानिस्तान में हरि रुड के नाम से जाना जाता है। तीन देशों को तुर्कमेनिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान को तारने वाली इस नदी का पौराणिक महत्व है। वैदिक युग और बौद्ध काल की गुफाएं आज भी इस नदी के किनारे पर मिलती हैं। शनिवार को इस नदी पर बना सलमा डैम एक और ऐतिहासिक निशानी बन गया है जो भारत के इतिहास को अफगानिस्तान के वर्तमान से जोड़ देता है। ... Full story

COMMENTARY

image

यूं ही नहीं होता किसी फौजिया का कंदील हो जाना

पाकिस्तान की सनसनी पच्चीस साल की कंदील बलोच रात के अंधेरे में सन्नाटे में समा गयी। उसके दो भाइयों ने ही रात के अंधेरे में जब वह सो रही थी तब उसका गला दबाकर मार दिया। फौजिया उर्फ कंदील बचोल सिर्फ दो तीन सालों में ही पाकिस्तान के लिए एक सनसनी बन गयी थी क्योंकि सोशल मीडिया पर वह सीधे सीधे पाकिस्तानी के कट्टरपंथ को चुनौती देती थी। उसके इस काम के कारण कुछ लोग उसकी तुलना भारत की राखी सावंत या पूनम पांडे से भी करते थे कि यह सब वह पब्लिशिटी के लिए कर रही है लेकिन ऐसा नहीं था।
image

शिक्षा की राजनीति

आगे बढे इससे पहले कुछ तथ्य। आज की तारिख में हरियाणा और मध्यप्रदेश के पूर्व शिक्षा मंत्री जेल में हवा खा रहे हैं। चौटाला साहब क्यों जेल में बंद है इसके बारे में ज्यादा बताने की जरूरत नहीं है। ये सारे लोग शिक्षा के नाम पर फर्जी कारनामें किए हुए हैं। मध्यप्रदेष का ब्यापम घोटाला में क्या हुआ, आप सबको जानकारी है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री की पढाई लिखाई कितनी है इसकी जानकारी आप रखते ही हैं। ऊपर से उनकी ढिठाई अलग से। हालाकि राजनीति में शिक्षा की अहमियत कुछ भी नहीं है। लेकिन उम्मीद की जाती है कि शिक्षामंत्री शिक्षित हों, ज्ञानी हो, चरित्रवान हो तथा ईमानदार हों। लेकिन राजनीति में ईमानदारी कहां? ईमानदार ठोकरें खाते हैं और बेइमान सर्वत्र पूजयेत। तो अब आइए शिक्षा की राजनीति पर।
image

कश्मीर में आतंक का सामाजीकरण

श्रीनगर से 3 से 6 घंटे की दूरी पर कुपवाड़ा का केरन, तंगधार, नौगाम और मच्चछल ऐसे क्षेत्र है जहां से लगातार घुसपैठ होती है। पहले ऐसी घुसपैठ बांदीपुरा के गुरेज सेक्टर से होती थी लेकिन सेना ने वहां चौकसी बढाई तो घुसपैठ बंद हो गई। तो यह सवाल हर जहन में आ सकता है कि सेना चाहे तो ठीक उसी तरह इन इलाको में घुसपैठ रोक सकती है लेकिन पहली बार वादी में सवाल सीमापार से घुसपैठ से कही आगे देश के भीतर पनपते उस गुस्से का हो चला है जिसकी थाह कोई ले नहीं रहा और जिसका लाभ आंतकवादी उठाने से नहीं चूक रहे। जिस तरह कूपवाडा में मारा गया आतंकवादी समीर अहमद वानी के जनाजे में शामिल होने के लिये ट्रको में सवार होकर युवाओ के जत्थे दर जत्थे सोपोर गये हैं उसने यह नया सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आंतक की परिभाषा कश्मीर में बदल रही है या फिर आतंक का सामाजिकरण हो गया है? नई पीढी को इस बात का खौफ नहीं कि मारा गया समीर आंतकवादी था और वह उसके जनाजे में शामिल होंगे तो उनपर भी आतंकी होने का ठप्पा लग सकता है बल्कि ऐसे युवाओं को लगने लगा है कि उनके साथ न्याय नहीं हो रहा है और हक के लिये हिंसा को आंतक के दायरे में कैसे रखा जा सकता है?
image

कब युवा होगी कांग्रेस?

नेहरु खानदान की चौथी पीढ़ी अगर यह सोचकर कांग्रेस की कमान संभालने की तैयारी कर रही है कि वह देश की कमान भी संभाल लेगी या जनता राहुल गांधी के हाथ में देश की बागडोर सौप देगी तो इससे ज्यादा बड़ा कोई सपना मौजूदा वक्त में हो नहीं सकता है। क्योंकि कांग्रेसियों को नहीं पता है कि उसे सर्जरी करनी भी है तो कहां करनी है। वोट बैंक तो दूर खुद बिखरे कांग्रेसियों को ही कांग्रेस कैसे जोड़े इस सच से वह दूर है। फिर आजादी के दौर के बोझ को लिये कांग्रेस मौजूदा सबसे युवा देश को कैसे साधे इसके उपाय भी नहीं है। इसीलिये कांग्रेस को लेकर सारी बहस कमान संभालने पर जा ठहर रही है।
  1. बाढ़ से ज्यादा झूठ का प्रकोप (5.00)

  2. सपा ने रद्द किया आजम खान का निष्कासन (5.00)

  3. अब शुरू हुआ असली खेल (5.00)

  4. आसान नहीं है कश्मीर का समाधान (5.00)

  5. अशोक चव्हाण ने इस्तीफा दिया, कलमाड़ी हटाये गये (5.00)

मुक्त अभिव्यक्ति (संपादक को भेजे अपनी खबर)